सांस्कृतिक

 


दिनांक २७.०३.२००११ से ग्राम पकरी में श्री मदभागवत कथा का प्रारंभ हो रहा है पं० शिवा कान्त जी महाराज के द्वारा कथा का वर्णन किया जा रहा है यह कथा सात दिनो तक चलेगी एवं ०३.०४.२०११ को हवन और भोज का आयोजन किया है|


पहनावा: यहाँ की महिलाएँ साधारण सभी जगह की तरह ही साडी, सलवार सूट, और श्रृंगार में कान में बाले, नथ, बाली, हार, बेन्दि, पैर में पायल, तोडिया, बिच्छिया कमर मे कर्ध्नी, पेटी आदि  पहनती है जो की चाँदी और सोने की होती है| एवं लोग अपनी सुभिधा के अनुसार पहनते है| पुरुष: यहाँ के पुरुष साधारण पैंट शर्ट, जींस-टी शर्ट, बुजुर्ग धोती कुर्ता पहनते है|


पंचायत के लोगों का ख़ान-पान साधारण ही है यहाँ सभी जाती के लोग रहते हैं यहाँ की भाषा हिन्दी है एवं इस ग्राम पंचायत में सभी त्योहार मनाए जाते है चाहे वो हिंदू के हो या फिर मुस्लिम या फिर अन्य धर्म या जाती के हो, सभी लोग मिल-जुल कर रहते है इस ग्राम पंचायत में दो बार मेला लगता है एक तो भीसार गाँव में दंगल का आयोजन होता जिसमें देश के सभी जिले से पहलवान आते है जो वर्ष में एक बार होता है दूसरा ग्राम पकरी में होता है जो की 40 – 50 वर्षों से हो रहा है|